दिल्ली में हाल ही में सामने आए चर्चित होटल हादसे के बाद एक बार फिर 'बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) स्कीम' चर्चा में आ गई है। जिस प्रतिष्ठान में यह हादसा हुआ, वह कथित तौर पर इसी योजना के तहत संचालित हो रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह योजना क्या है और इसकी शुरुआत किस उद्देश्य से की गई थी।
क्या है बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) स्कीम?
दिल्ली में यह योजना सरकार के दौरान शुरू की गई थी। इसका मकसद राजधानी आने वाले पर्यटकों को होटल के बजाय घर जैसा सुरक्षित और पारिवारिक माहौल उपलब्ध कराना था।
योजना के तहत कोई भी मकान मालिक अपने घर के कुछ कमरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करा सकता था। मेहमानों को रहने के साथ नाश्ते (Breakfast) की सुविधा दी जाती थी, इसलिए इसे "बेड एंड ब्रेकफास्ट" नाम दिया गया।
योजना शुरू करने के पीछे क्या सोच थी?
इस स्कीम का उद्देश्य था:
पर्यटकों को भारतीय पारंपरिक परिवारों के साथ रहने का अनुभव देना।
कम खर्च में बेहतर आवास उपलब्ध कराना।
दिल्ली में पर्यटन को बढ़ावा देना।
छोटे मकान मालिकों को अतिरिक्त आय का स्रोत देना।
बड़े होटलों पर दबाव कम करना।
सरकार का मानना था कि इससे विदेशी और घरेलू पर्यटक भारतीय संस्कृति को करीब से समझ सकेंगे और उन्हें अधिक सुरक्षित व घरेलू वातावरण मिलेगा।
दो बार हुए संशोधन
समय के साथ इस योजना में कई बदलाव किए गए। बढ़ती मांग और व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए नियमों में संशोधन कर पंजीकरण, सुरक्षा मानकों और संचालन संबंधी शर्तों को अपडेट किया गया। हालांकि आलोचकों का कहना है कि कई जगहों पर निगरानी और अनुपालन कमजोर पड़ गया, जिसके कारण कुछ प्रतिष्ठान होटल की तरह संचालित होने लगे।
अब क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हालिया हादसे के बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या संबंधित प्रतिष्ठान वास्तव में B&B योजना के नियमों का पालन कर रहा था या नहीं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि:
क्या आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण मौजूद थे?
अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं?
स्वीकृत क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया जा रहा था या नहीं?
B&B के नाम पर व्यावसायिक होटल तो नहीं चलाया जा रहा था?
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि B&B योजना का मूल उद्देश्य पर्यटकों को सुरक्षित और घरेलू माहौल उपलब्ध कराना था, लेकिन यदि नियमों की अनदेखी कर इसे व्यावसायिक होटल संचालन का माध्यम बनाया गया हो तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या प्रशासनिक चूक कितनी जिम्मेदार थी।

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