भुवनेश्वर। बहुचर्चित टेंडर घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने जांच के दौरान मिले सबूतों और वित्तीय लेन-देन के आधार पर तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अब तक 11.50 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और संपत्तियों का खुलासा हो चुका है। इससे पहले इस घोटाले में कथित मास्टरमाइंड रिशुश्री और उसके सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया था। उनकी पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसके बाद अधिकारियों की भूमिका सामने आई।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों का आरोप है कि विभिन्न सरकारी विभागों के टेंडरों में नियमों को दरकिनार कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने का नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके आवंटित किए गए और इसके बदले अवैध आर्थिक लाभ लिया गया।
जांच में क्या मिला?
₹11.50 करोड़ से अधिक की बरामदगी
संदिग्ध बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी
कई कंपनियों और ठेकेदारों से जुड़े दस्तावेज
डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज जब्त
बढ़ सकती हैं और गिरफ्तारियां
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां अब इस मामले में अन्य अधिकारियों, ठेकेदारों और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। कई और लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जा सकते हैं।
सरकार ने मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में सामने आए बड़े टेंडर घोटालों में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की वित्तीय परतें खोलने में जुटी हैं, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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