नई दिल्ली बौद्धिक प्रतिकार
सोने पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी और लगातार ऊंचे दामों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या घरों में वर्षों से पड़ा पुराना सोना दोबारा बाजार में लौटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे सोने और बढ़ती आयात लागत के कारण बाजार की मांग में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। वहीं दूसरी ओर लोग पुराने गहने बेचने या गिरवी रखने की ओर भी बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में लगातार उछाल के चलते आम ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हो रही है। ऐसे में नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय लोग अपने पुराने गहनों को एक्सचेंज या बेचने का विकल्प चुन सकते हैं। खासकर शादी और निवेश के लिए सोना खरीदने वाले ग्राहक अब ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भारत में घरों में बड़ी मात्रा में सोना निष्क्रिय रूप से रखा हुआ है। यदि बाजार में कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो लोग इसे नकदी में बदलने के लिए बेच सकते हैं। इससे सेकेंडरी गोल्ड मार्केट में गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
आर्थिक विश्लेषकों ने यह भी आशंका जताई है कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। जब वैध आयात महंगा होता है, तब अवैध तरीके से सोना लाने की कोशिशें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा गोल्ड लोन की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है, क्योंकि लोग अपने पास रखे सोने के बदले नकदी हासिल करना चाहेंगे।
सरकार की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का उद्देश्य घरेलू बाजार को संतुलित करना और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना माना जा रहा है। हालांकि इसका सीधा असर ज्वेलरी कारोबार और उपभोक्ताओं की खरीदारी पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतों और मांग दोनों पर नजर रखना बेहद अहम होगा।

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