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अनुराग जैन के बाद कौन? नए मुख्य सचिव की दौड़ में चार बड़े नाम, सत्ता गलियारों में तेज हुई खींचतानWho succeeds Anurag Jain? Four prominent names are in the running for the new Chief Secretary position, and the tussle intensifies within the corridors of power.


भोपाल: मध्य प्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि अनुराग जैन के बाद प्रदेश का अगला मुख्य सचिव कौन बनेगा। सितंबर में सेवानिवृत्ति से पहले ही सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।



दौड़ में फिलहाल चार बड़े नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बताए जा रहे हैं — नीरज मंडलोई, पंकज अग्रवाल, डॉ. राजेश राजौरा और संजय दुबे।


सबसे आगे कौन?


प्रशासनिक हलकों में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में डॉ. राजेश राजौरा का नाम तेजी से उभरता बताया जा रहा है। वरिष्ठता, लंबा अनुभव और सत्ता के साथ तालमेल उन्हें मजबूत स्थिति में खड़ा करता दिखाई दे रहा है। कहा जा रहा है कि यदि सरकार “अनुभव और संतुलन” के फार्मूले पर चली तो राजौरा सबसे आगे निकल सकते हैं।


वहीं संजय दुबे का नाम भी अचानक तेजी से चर्चा में आया है। सूत्रों का दावा है कि पिछले दिनों उनकी फाइल उच्च स्तर पर देखी गई, जिसके बाद अटकलों का दौर तेज हो गया। हालांकि उनके नाम पर अंतिम फैसला आसान नहीं माना जा रहा।


दिल्ली कनेक्शन भी बना फैक्टर


पंकज अग्रवाल का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि वे इस समय दिल्ली में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सत्ता के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि केंद्र की सहमति बनी तो उनका नाम अचानक आगे बढ़ सकता है।


नीरज मंडलोई का नाम वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव के कारण चर्चा में जरूर है, लेकिन राजनीतिक समीकरण उनके पक्ष में कितने मजबूत हैं, इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।


नौकरशाही में शुरू हुआ “लॉबिंग का मौसम”


मुख्य सचिव की कुर्सी खाली होने में अभी समय है, लेकिन मंत्रालय से लेकर दिल्ली तक सक्रियता बढ़ गई है। अफसरों के समर्थक अपने-अपने दावे मजबूत करने में जुटे बताए जा रहे हैं। सत्ता के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस बार फैसला केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक भरोसा, प्रशासनिक पकड़ और आने वाले चुनावी समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाएंगे।

अनुराग जैन का अगला कदम क्या?

इधर अनुराग जैन के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें किसी बड़े आयोग, नीति संस्थान या राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिल सकती है। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि केंद्र सरकार उनके अनुभव का उपयोग करना चाहती है।

चुनावी साल में अहम होगी भूमिका

प्रदेश में आने वाले समय में नगरीय निकाय और विधानसभा से जुड़े राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। ऐसे में सरकार ऐसा मुख्य सचिव चाहती है जो प्रशासनिक सख्ती के साथ राजनीतिक संकेतों को भी समझता हो।


फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि मुख्य सचिव की यह दौड़ केवल प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन का बड़ा संकेत साबित होगी।

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