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नासिक TCS केस, NCW की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, धर्म का अपमान, युवतियों का यौन उत्पीड़न शामिलNashik TCS case: NCW report reveals shocking details, including religious insults and sexual harassment of young women

 


दिल्ली: महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़े मामले के संबंध में व्यापक उत्पीड़न, धर्म का अपमान, बदनामी और सुनियोजित तरीके से धमकाने सहित कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं.


ताजा खुलासा एनसीडब्ल्यू को उसकी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की इस मामले पर सौंपी गई रिपोर्ट में हुआ है. महिला अधिकार संस्था ने पहले टीसीएस नासिक से जुड़ी कई महिला कर्मचारियों के गंभीर आरोपों के बाद मिली शिकायतों के मामले पर खुद से संज्ञान लिया था. चेयरपर्सन विजया रहाटकर के निर्देश पर एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई गई थी.


कमेटी ने पिछली बार नासिक का दौरा किया था, जहां उन्होंने पीड़ितों टीसीएस के यौन उत्पीड़न की रोकथाम आंतकरिक कमेटी (IC) के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों और दूसरे खास गवाहों से बातचीत की.

पैनल के मुख्य नतीजे

एनसीडब्ल्यू के मुताबिक कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पीड़न का जिक्र किया है. इसमें वर्कप्लेस के जहरीले माहौल का जिक्र किया गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर यौन उत्पीड़न और वर्कप्लेस पर अधिकार का गलत इस्तेमाल होता है.

एनसीडब्ल्यू ने पैनल की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, 'आरोपियों ने टीसीएस नासिक पर पूरा कंट्रोल कर लिया था. वे जवान और कमजोर लड़कियों को टारगेट करते थे और उन्हें सेक्सुअली, इमोशनली और मेंटली हैरेस करते थे. शिकायत करने वालों का सच में आरोपियों ने सेक्सुअली हैरेसमेंट किया था, छेड़छाड़ की कोशिशें की थी.'

धर्म का अपमान और उसे नीचा दिखाना

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शिकायत करने वाली और काम की जगह पर दूसरों को धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ा. महिला अधिकार संस्था ने कहा, 'आरोपी हिंदू धर्म की कहानियों, मान्यताओं, परंपराओं और रीति-रिवाजों का अपमान करके और लड़कियों को यह कहकर धमकाता था कि इस्लाम हिंदू धर्म से कहीं बेहतर धर्म है. आरोपी हिंदू धर्म में आस्था को नीचा दिखाने और उसे छोटा दिखाने में शामिल थे और महिला कर्मचारियों पर बार-बार धर्म के खिलाफ कमेंट करके दबाव वाला माहौल बनाते थे.'

सिस्टेमिक डराना-धमकाना

कमेटी ने कहा कि यह वर्कप्लेस पर सेक्शुअल हैरेसमेंट का एक आम मामला था, जिसमें महिला कर्मचारियों को डराना-धमकाना, पीछा करना, और ऐसे कामों, कमेंट्स और व्यवहार के तरीकों से उन्हें नीचा दिखाना शामिल था. इससे महिला कर्मचारियों को बेइज्जती महसूस हुआ. उन्हें वर्कप्लेस पर लगातार मेंटल हैरेसमेंट का सामना करना पड़ा.

डर और दबाव

एनसीडब्ल्यू के अनुसार कई महिला कर्मचारी शिकायत दर्ज कराना चाहती थी लेकिन ऐसा करने से डरती थी. उन पर काफी सामाजिक दबाव था, अपने परिवारों को सामाजिक बदनामी का सामना करने का डर था और सबसे बढ़कर, शिकायत करने का कोई औपचारिक तरीका और भरोसेमंद माहौल पूरी तरह से नदारद था.

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