पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक और प्रमुख सहयोगी को बेंगलुरु जेल में कट्टरपंथी बनाने के 2023 के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि बेंगलुरु की विशेष अदालत ने विक्रम कुमार उर्फ छोटा उस्मान को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.
विक्रम इस मामले में दोषी ठहराए जाने और सजा पाने वाला आठवां आरोपी है. एनआईए की जांच में पता चला कि आरोपी विक्रम कुमार को बेंगलुरु जेल में बंद रहने के दौरान लश्कर सदस्य टी. नसीर और सह-आरोपी जुनैद अहमद द्वारा कट्टरपंथी बनाया गया और अपने साथ शामिल किया गया था.
दरअसल प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा (एलईटीटी) आतंकवादी संगठन के एक अन्य प्रमुख आतंकवादी को एनआईए की विशेष अदालत ने 2023 के बेंगलुरु जेल में कट्टरपंथी बनाने के मामले में दोषी ठहराया और सजा सुनाई. बेंगलुरु की विशेष अदालत ने विक्रम कुमार उर्फ छोटा उस्मान को आईपीसी, यूए (पी) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सात साल के कठोर कारावास और 30,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है.
यह मामला मूल रूप से बेंगलुरु केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) द्वारा जुलाई 2023 में आदतन अपराधियों से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण जब्त किए जाने के बाद दर्ज किया गया था, जिन्होंने लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए बेंगलुरु शहर में सिलसिलेवार आतंकी हमले करने की योजना बनाई थी.
सीसीबी से केस अपने हाथ में लेने वाली एनआईए ने इस मामले में शामिल व्यापक साजिश का खुलासा किया था, जिसमें नसीर को भागने में मदद करने की साजिश भी शामिल थी. आतंकवाद रोधी एजेंसी ने जुनैद समेत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जो अभी भी फरार है. जुनैद को ढूंढने के प्रयास जारी हैं.

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