भोपाल। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर बढ़े विवाद के बीच Pradeep Joshi एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के प्रमुख के रूप में उनकी कार्यशैली और पुराने प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराने के फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक NTA की कार्यप्रणाली पर बहस तेज हो गई है। इसी बीच प्रदीप जोशी के पुराने कार्यकालों से जुड़े विवाद भी फिर सामने आने लगे हैं।
प्रदीप जोशी इससे पहले Madhya Pradesh Public Service Commission के चेयरमैन रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर कई बार अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। उम्मीदवारों ने रिजल्ट में देरी, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए थे।
इसके बाद वे Union Public Service Commission में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वहां भी कुछ चयन प्रक्रियाओं और परीक्षा संचालन को लेकर आलोचनाएं सामने आई थीं। अब NTA में NEET विवाद के बाद विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और परिणामों में गड़बड़ी जैसे मामलों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।
वहीं NTA का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। एजेंसी ने NEET UG 2026 दोबारा कराने की घोषणा के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रों से दोबारा परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा और पहले जमा फीस का समायोजन या रिफंड किया जाएगा।

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