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MPRDC में ‘महाघोटाले’ का दावा, ED के कथित नोटिस लीक होने से मचा हड़कंपClaims of a 'mega scam' in MPRDC, alleged leak of ED notice creates stir

 DGM संजय वर्णवाल पर गंभीर आरोप, शेल कंपनियों, बेनामी संपत्ति और बैंकिंग कनेक्शन पर उठे सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। एक कथित ‘कॉन्फिडेंशियल’ ईडी नोटिस सोशल मीडिया और कुछ अखबारों में सामने आने के बाद निगम के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। मामला MPRDC के डीजीएम संजय वर्णवाल से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन पर बेनामी संपत्तियों, शेल कंपनियों और करोड़ों के वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।



रिपोर्ट के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से 5 मई 2026 को जारी कथित गोपनीय पत्र में MPRDC के DGM संजय वर्णवाल से संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों और वित्तीय स्रोतों की जानकारी मांगे जाने का दावा किया गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर ED या MPRDC ने इस पत्र की पुष्टि नहीं की है।

किन-किन नामों का जिक्र?

इस पूरे मामले में जिन नामों की चर्चा सामने आई है, उनमें:

संजय वर्णवाल — DGM, MPRDC

भारत यादव — MD, MPRDC

शिकायतकर्ता के रूप में कुछ दस्तावेजों में सचिन बोधनिया का नाम

कथित कारोबारी और बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य निजी लोगों और कंपनियों के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।

‘हेडक्वार्टर बेचने की कोशिश’ का आरोप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भोपाल के कोलार रोड स्थित एक आलीशान मकान को लेकर भी जांच एजेंसियों की नजर है। आरोप है कि नोटिस सामने आने के बाद संपत्तियों को बेचने या ट्रांसफर करने की कोशिश हुई। यहां तक कि “FOR SALE” बोर्ड लगाने तक की बात कही गई है।

शेल कंपनियों और करोड़ों की संपत्ति पर सवाल

प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार जांच के दायरे में कुछ कथित शेल कंपनियां भी हैं। आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए करोड़ों की संपत्तियों और निवेश को खड़ा किया गया। कुछ दस्तावेजों में परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नाम पर संपत्ति खरीदने के दावे भी किए गए हैं।

बैंकिंग कनेक्शन पर भी चर्चा

खबरों में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समेत कुछ बैंकिंग लेनदेन का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि करोड़ों के वित्तीय ट्रांजेक्शन और संपत्ति निवेश की जांच की मांग उठाई गई है।

MPRDC और सरकार की चुप्पी

अब तक MPRDC प्रबंधन या राज्य सरकार की तरफ से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज बताई जा रही है।

विपक्ष को मिला मुद्दा

मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और संरक्षण का खेल चल रहा है। वहीं भाजपा की ओर से फिलहाल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि बाकी

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि वायरल दस्तावेजों और कथित ED नोटिस की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए आरोपों की सत्यता जांच और एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

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