तमिलनाडु में TVK का विजय तिलक, असम के बागान में खिला कमल, बंगाल में हिली ममता की सत्ता
5 रणभूमि, 823 सीटों मेंसे.....तीन रणभूमि हुई भगवामय .
देश के पांच बड़े चुनावी मोर्चों - असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतगणना हो चुकी हैं। एक महीने तक चले इस चुनावी महासंग्राम में कुल 823 सीटों पर मतदान हुआ था, जिसके नतीजे सामने आएं। इन सभी राज्यों में मतदान 9 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच अलग-अलग चरणों में संपन्न हुआ। केरलम, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग हुई, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ। दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को कराई गई।
भाजपा पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने की ओर अग्रसर है, जबकि असम में वह एक बार फिर से वापसी करती दिख रही है।
तमिलनाडु में अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली नई पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला 'संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा' (UDF) सत्ता में वापसी करने की स्थिति में है, जबकि पुडुचेरी में 17 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है।
असम में बीजेपी की जीत की हैट्रिक
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने की ओर अग्रसर हैं। पार्टी 126 में से 74 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस 23 सीटों के साथ काफी पीछे चल रही है। एग्जिट पोल्स में भी बीजेपी के लिए जबरदस्त जीत का अनुमान लगाया गया था।
तमिलनाडु में टीवीके ने दी डीएमके को चुनौती
तमिलनाडु में एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां विजय की टीवीके कई अहम सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) दूसरे नंबर पर है, जबकि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) बढ़त के मामले में तीसरे स्थान पर है।
स्टालिन की डीएमके पिछले एक दशक से सत्ता में है। टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने से दो मुख्य द्रविड़ पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके के बीच चली आ रही पारंपरिक द्वंद्व की स्थिति खत्म हो जाएगी।
सितंबर 2025 में एक रैली के दौरान मची भगदड़ से जुड़े पिछले विवाद के बावजूद विजय की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में यह शानदार प्रदर्शन किया है। इस नतीजे ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक नई ताकत के तौर पर स्थापित कर दिया है। मुमकिन है कि वे उन पहले के अभिनेता-राजनेताओं की कतार में शामिल हो जाएं, जिन्होंने राजनीति में आकर शासन-प्रशासन में सफलतापूर्वक अपनी जगह बनाई थी।
केरल: यूडीएफ की वापसी तय, वामपंथ का ग्राफ गिरा
केरल में वोटों की गिनती जारी रहने के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने मजबूत बढ़त बना ली है। इससे यह संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार के सत्ता गंवाने की संभावना है।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सन्नी जोसेफ ने इन रुझानों को यूडीएफ के पक्ष में स्पष्ट बदलाव का संकेत बताया और विश्वास जताया कि यह गठबंधन 140 सदस्यीय विधानसभा में 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगा। इस नतीजे से कांग्रेस पार्टी को दक्षिण में एक राज्य सरकार मिल जाएगी, जहां हाल के चुनावों में उसकी मौजूदगी कम हो गई है।
पुडुचेरी का हाल
पुडुचेरी 30 सदस्यों वाली विधानसभा है। रुझानों से पता चलता है कि बीजेपी प्लस ने 22 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है। यहां की स्थिति भी स्पष्ट नजर आ रही है और बीजेपी प्लस सरकार बनाते हुए दिख रही है।
विपक्ष पर मंडराता खतरा
राज्यों के मौजूदा चुनावों का यह दौर हाल के चुनावों में बीजेपी की सफलताओं के क्रम को ही आगे बढ़ाता है। पार्टी की जीत का यह सिलसिला 2014 के आम चुनावों से शुरू हुआ था। फरवरी 2025 में बीजेपी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) को हराकर अरविंद केजरीवाल को सत्ता से हटा दिया।
नवंबर 2025 में जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बिहार में जबरदस्त जीत हासिल की और नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार ने इस पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे भाजपा-विरोधी प्रमुख मुख्यमंत्रियों की संख्या कम हो गई।
2026 के चुनावों ने कई स्थापित विपक्षी नेताओं की स्थिति को सवालों के घेरे में ला दिया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन और केरल में पिनाराई विजयन इन सभी के सामने अपनी सत्ता गंवाने का खतरा मंडरा रहा है, बशर्ते मौजूदा रुझान इसी तरह बने रहें।
कई वरिष्ठ नेताओं के अब राज्य सरकारों का नेतृत्व न करने से विपक्ष का स्वरूप बदलने की संभावना है। कांग्रेस के लिए केरल में सरकार बनने की संभावना एक तरह की मजबूती प्रदान करती है। पार्टी नेता इसे दो कारणों से महत्वपूर्ण मानते हैं।
एक तो राज्य प्रशासन पर नियंत्रण पाने के लिए और दूसरा विपक्ष के ढांचे के भीतर राहुल गांधी की स्थिति को मजबूत करने के लिए। खासकर तब, जब अन्य संभावित दावेदार मुख्यमंत्री के पदों से हट रहे हैं।

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