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जनता को बचत का पाठ, अफसरों की शाही सवारी पर हर महीने करोड़ों की उड़ान!Lessons of saving for the public, while officers spend crores of rupees every month on their royal rides!



एक तरफ देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील हो रही है, दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में अफसरों की लग्जरी गाड़ियां सरकारी खजाने पर भारी पड़ रही हैं। अब खुद सरकार को एहसास हुआ है कि अफसरशाही की शानो-शौकत में हर महीने करोड़ों रुपये धुएं में उड़ रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 600 से ज्यादा महंगी गाड़ियां किराए पर दौड़ रही हैं, जिन पर हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। हालत यह है कि कई अफसरों के पास पहले से सरकारी वाहन मौजूद हैं, इसके बावजूद अलग से महंगी गाड़ियां किराए पर ली जा रही हैं। कुछ अधिकारी तो दो-दो और तीन-तीन गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अब वित्त विभाग पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के नाम पर नए दिशा-निर्देश लाने की तैयारी कर रहा है। ई-वाहनों को बढ़ावा देने और लग्जरी गाड़ियों पर रोक लगाने की बात कही जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार को खुद पता है कि करोड़ों रुपये सिर्फ अफसरों की सवारी पर खर्च हो रहे हैं, तो अब तक इस फिजूलखर्ची पर लगाम क्यों नहीं लगाई गई? जनता से बचत की अपील करने वाली व्यवस्था क्या पहले खुद अपनी शाही आदतें छोड़ेगी?

प्रदेश में आम आदमी महंगे पेट्रोल से परेशान है, लेकिन सत्ता और अफसरशाही की गाड़ियां बिना ब्रेक दौड़ रही हैं। ऐसे में लोगों के बीच यही चर्चा है कि ईंधन बचाने का बोझ आखिर हर बार जनता पर ही क्यों डाला जाता है?

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