Top News

सामान्य-ओबीसी, दलित-अति पिछड़ा… ऐसा है सम्राट सरकार का जातीय समीकरण, मंत्रिमंडल में साधे गए सभी बड़े वर्गGeneral-OBC, Dalit-Extremely Backward… Such is the caste equation of the Emperor government, all major classes have been accommodated in the cabinet.



पटना। बिहार की नई एनडीए सरकार ने गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार के साथ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बने नए मंत्रिमंडल में जातीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष फोकस दिखाई दिया। सरकार ने सवर्ण, ओबीसी, अति पिछड़ा, दलित, महादलित और मुस्लिम समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास किया है।

पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

नई कैबिनेट में कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें भाजपा के 15, जनता दल यूनाइटेड के 13, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 2, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक-एक नेता को मंत्री बनाया गया है।

सरकार के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया गया है। कुशवाहा, यादव, कुर्मी, बनिया, तेली और अति पिछड़ा समाज से कई नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा-जदयू ने ग्रामीण और पिछड़े वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। वहीं दलित और महादलित समाज से भी कई चेहरों को जगह देकर सामाजिक न्याय का संदेश देने की कोशिश की गई है।

सवर्ण वर्ग से भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ नेताओं को शामिल कर पारंपरिक वोट बैंक को साधने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा मुस्लिम समुदाय से भी प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल पूरी तरह चुनावी सामाजिक इंजीनियरिंग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

एनडीए नेतृत्व का मानना है कि बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हर बड़े वर्ग को सत्ता में हिस्सेदारी देकर विपक्ष के सामाजिक समीकरण को चुनौती देने की तैयारी की गई है। खासतौर पर राष्ट्रीय जनता दल के एम-वाई समीकरण और कांग्रेस के सामाजिक न्याय एजेंडे का मुकाबला करने के लिए एनडीए ने व्यापक सामाजिक संतुलन पर जोर दिया है।


शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में समर्थक भी पहुंचे। गांधी मैदान पूरी तरह एनडीए के झंडों और नारों से गूंजता रहा। भाजपा और जदयू नेताओं ने दावा किया कि नया मंत्रिमंडल विकास और सामाजिक संतुलन दोनों का मॉडल साबित होगा।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए एनडीए ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि बिहार में सत्ता का संतुलन अब केवल एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। आने वाले दिनों में विभागों के बंटवारे के बाद सरकार की वास्तविक राजनीतिक रणनीति और स्पष्ट हो जाएगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post