• रवि उपाध्याय
यह एक शास्वत सत्य है कि राजनीति में न तो कोई किसी का स्थायी दोस्त होता है और न ही कोई किसी का स्थायी दुश्मन होता है। इसी तरह नेताओं की कोई एक स्थायी विचारधारा भी नहीं होती है। वह जनहित के नाम पर अपना सुविधा अनुसार समय समय पर बदलती रहती है। परंतु सभी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं का यदि कोई एक स्थाई लक्ष्य होता है तो वह होता है सत्ता को हासिल करना। यह सच्चाई भी है कि राजनीति में नेता कोई भजन, हमद या सदका करने के लिए नहीं आता है। यह इनवेस्टमेंट है जो सुखद जीवन के लिए किया जाता है। यही परम सत्य है। बाद बाकी तो मिथ्या है।
इसका ताजातरीन उदाहरण हमको कल उस समय देखने को मिला जब कांग्रेस पार्टी के दलपति यानी राहुल गांधी ने डीएमके पार्टी से अपना 55 साल पुराना गठबंधन तोड़ कर तमिलनाडु में थलापति के नाम से विख्यात, मुख्यमंत्री पद के एक मात्र दावेदार नव गठित पार्टी टीवीके के सुप्रीमो तमिल फिल्मों के सुपर हीरो थलापति विजय को पार्टी को समर्थन देने की घोषणा कर दी।
कांग्रेस के इस निर्णय से तमिलनाडु में उसकी 55 सालों पुराना सहयोगी DMK भौंचक रह गया। डीएमके सुप्रीमो एम के स्टालिन ने कांग्रेस के इस कदम को पीठ में छुरा घोंपने वाला बताते हुए उसकी कटु आलोचना की है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को मौका परस्त बताया। सियासी दृष्टि से देखा जाए तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। डॉ राममनोहर लोहिया ने एक बार कहा था कि जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं हैं। सत्ताधारी दल के बगलगीर बने रहने के उद्देश्य से कांग्रेस तमिलनाडु में डीएमके सरकार को बिना मांगे समर्थन देती रही। इसका उसे फायदा भी हुआ होगा। तब कांग्रेस फिर अगले पांच साल तक विपक्ष में क्यों बैठती।
तमिलनाडु में 2021 में हुए विधान सभा चुनावों में डीएमके को 234 सदस्यीय विधासभा में 133 सदस्यों के साथ स्पष्टत बहुमत मिला था। कांग्रेस ने डीएमके गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था। तब उसे 18 सीट मिलीं थी। तब कांग्रेस ने डीएमके नेता स्टालिन से उनकी पार्टी को भी सरकार में शामिल करने के लिए खूब चिरौरी की पर वे जरा भी टस से मस नहीं हुए।
इसके बाद हाल ही में अप्रैल 2026 में जब विधानसभा के नए चुनाव हुए तो कांग्रेस ने फिर एक बार डीएमके गठबंधन के साथ मिल कर चुनाव लड़ा। तब 5 सालों की इनकमबेंसी और थलापति विजय की सिनेमाई लोकप्रियता के चलते उनकी नई नवेली पार्टी टीवीके 108 सीटें जीत कर बहुमत के काफी नजदीक पहुंच गई और डीएमके 65 सीट जीत कर सत्ता से बाहर हो गई । नए चुनावों में तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा और उसकी सीटें पिछले चुनावों के मुकाबले 18 से घट कर 05 रह गई।
कांग्रेस ने नई परिस्थितियों पर गौर किया और तय किया कि दीर्घकालीन चुनावी रणनीति के अनुसार टीवीके के साथ जाना ही लाभकारी रहेगा। साथ ही सत्ता धारी दल के साथ रहने से पार्टी का असर तो बना ही रहेगा। दूसरी ओर तीन साल बाद 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में उसे अधिक सीटें जीतने का मौका मिल जाएगा। शायद यही सब सोच कर राहुल गांधी ने यह निर्णय लिया और विदेश में होने के बावजूद विजय से फोन पर उनकी सरकार का समर्थन देने की बात कही।
अन्नाद्रमुक टूट की कगार पर : चेन्नई में यह खबर है कि अन्ना द्रमुक का एक बड़ा धड़ा भी विजय की टीवीके पार्टी को समर्थन देने को आतुर है। बता दें कि टीवीके को अप्रैल 2026 के चुनावों में 108 सीटों पर जीत हासिल हुई है। जबकि विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। विजय ने अपने विधायकों की सूची चेन्नई में गवर्नर को सौंप कर सरकार बनाने का दावा ठोक दिया है। परंतु राज्यपाल उनके दावे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
इंडिया गठबंधन में टूट संभव : कांग्रेस पार्टी द्वारा हाल ही में जिस तरह के कदम उठाए हैं उसके चलते इंडिया गठबंधन में दरार पड़ने की आशंका बढ़ गईं हैं। बता दें कि इंडिया गठबंधन में डीएमके एक मात्र ऐसी पार्टी रही है जो संसद में हो या उसके बाहर हमेशा हमेश राहुल गांधी का दृढ़ता से समर्थन करती रही है। जबकि सपा के साथ हमेशा से ऐसा नहीं रह है। इसी तरह ममता बनर्जी ने भी इंडिया गठबंधन के गठन से आज तक के पिछले नौ साल में राहुल गांधी के नेतृत्व का समर्थन नहीं किया है। यहां तक कि सपा के अखिलेश यादव और राजद के लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव भी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व के लिए ममता बनर्जी को राहुल गांधी से बेहतर विकल्प मानते हैं। यही हाल दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का है। वे भी ममता के समर्थन में हैं
चंद दिनों पहले पश्चिम बंगाल के विधान सभा चुनावों में भी राहुल गांधी ममता बनर्जी के खिलाफ पूरे राज्य में कांग्रेस ने 284 उम्मीदवार खड़े कर दिए। हालांकि उनमें से कांग्रेस के 02 उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके। ये दोनों उम्मीदवार भी मुस्लिम होने के चलते मुस्लिम बाहुल्य इलाकों से जीते। इनमें फरक्का से मोताब शेख और रानीनगर से जुल्फिकार अली शामिल हैं।
( लेखक राजनैतिक समीक्षक एवं एक व्यंग्यकार भी हैं । )
07052026
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