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दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत कई AAP नेताओं को जारी किया अवमानना नोटिस, जानिए क्या है मामलाDelhi High Court issues contempt notice to several AAP leaders including Kejriwal and Sisodia, know what is the matter

 



नेशनल डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने हाई कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अपमानजनक और आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कई अन्य 'आप' नेताओं को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है।


जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई की। अदालत ने सभी संबंधित नेताओं को अपना रुख स्पष्ट करने और जवाब दाखिल करने के लिए 1 महीने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 4 अगस्त को होगी।


किन-किन नेताओं को मिला नोटिस?

हाई कोर्ट ने जिन प्रमुख 'आप' नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, उनमें शामिल हैं:


· अरविंद केजरीवाल


· मनीष सिसोदिया


· संजय सिंह


· सौरभ भारद्वाज


· दुर्गेश पाठक और अन्य नेता


क्या है पूरा मामला और क्यों शुरू हुई अवमानना की कार्रवाई?

यह पूरा विवाद आबकारी नीति (Excise Policy) मामले से जुड़ा हुआ है। दरअसल, जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने 14 मई को खुद इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। जस्टिस शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कानूनी रास्ते अपनाने के बजाय उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर बदनामी का एक "सोचा-समझा अभियान" चलाया।


नेताओं पर लगे मुख्य आरोप


न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल: 'आप' नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए न्यायाधीश पर "राजनीतिक निष्ठा" और किसी खास राजनीतिक दल से "जुड़ाव" होने के आरोप लगाए।

 एडिटेड वीडियो का इस्तेमाल: कथित तौर पर वाराणसी के एक शिक्षण संस्थान में जस्टिस शर्मा द्वारा दिए गए भाषण के एक हिस्से को तोड़-मरोड़ कर और "एडिट" करके सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, ताकि उन्हें निशाना बनाया जा सके।

बेंच में बदलाव: इस विवाद के बाद जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि आबकारी नीति मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका पर अब उनकी बेंच सुनवाई नहीं करेगी, बल्कि इसे किसी दूसरी बेंच को भेजा जाएगा।

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