इन्दौर । बौद्धिक प्रतिकार
प्रणव बजाज
5 करोड़ की जमीन 60 करोड़ पहुंची, बाईपास का रूट तीन बार बदला गया; CM मोहन यादव से हाई लेवल जांच की मांग
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रस्तावित 35 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न बाईपास प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 3200 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ (SPA) ने आरोप लगाया है कि कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों ने प्रोजेक्ट की मंजूरी से पहले ही तय रूट के आसपास करोड़ों की जमीन खरीद ली थी और बाद में बाईपास का अलाइनमेंट उसी क्षेत्र से निकाल दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जनता की सुविधा के नाम पर बनने वाला बाईपास अफसरों की जमीनों के आसपास ही क्यों घूमता रहा? आरोप है कि परियोजना का अलाइनमेंट तीन बार बदला गया और हर बार रास्ता कथित तौर पर उन्हीं जमीनों के नजदीक पहुंचा, जहां अधिकारियों या उनके परिजनों की संपत्तियां बताई जा रही हैं।
16 महीने पहले जमीन खरीद, फिर मिली परियोजना को मंजूरी
SPA के अध्यक्ष और रिटायर्ड IFS अधिकारी आजाद सिंह डबास ने दावा किया है कि 4 अप्रैल 2022 को भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित गुराड़ी घाट गांव में लगभग 2.023 हेक्टेयर जमीन एक रजिस्ट्री के जरिए खरीदी गई। आरोप है कि इस सौदे में कई वरिष्ठ अफसरों के नाम जुड़े हुए हैं। उस समय जमीन की कीमत लगभग 5.5 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि अब उसकी कीमत 55 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जमीन खरीद के करीब 16 महीने बाद यानी अगस्त 2023 में वेस्टर्न बाईपास परियोजना को मंजूरी मिली। इसके बाद जमीन का लैंड यूज बदलने और कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में परिवर्तित करने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
“जनता के लिए नहीं, अफसरों को फायदा पहुंचाने वाला प्रोजेक्ट?”
SPA ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिकायत भेजकर पूरे प्रोजेक्ट को रद्द करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि यह परियोजना ट्रैफिक समाधान से ज्यादा कुछ प्रभावशाली लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले ने हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रहा है, जबकि प्रशासनिक हलकों में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नामों को लेकर बढ़ी उत्सुकता, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार या जांच एजेंसियों की ओर से किसी अधिकारी का आधिकारिक नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जनता पूछ रही- सड़क पहले तय हुई या सौदा?
भोपाल में अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि क्या बाईपास का रूट शहर की जरूरत देखकर तय किया गया था, या फिर पहले जमीन खरीदी गई और बाद में सड़क वहां पहुंचा दी गई? अगर आरोप सही निकले, तो यह प्रदेश के सबसे बड़े “लैंड गेम” में से एक साबित हो सकता है।
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