ईरान में जारी तनाव के वैश्विक असर को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। केंद्र ने करीब ₹1.81 लाख करोड़ की राहत योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई, आपूर्ति बाधाओं और ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम करना है।
सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार मार्गों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में इस राहत पैकेज के जरिए आम लोगों और उद्योगों दोनों को सहारा देने की कोशिश की जा रही है।
योजना के तहत ईंधन, खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए जाएंगे। साथ ही परिवहन, उर्वरक और छोटे उद्योगों को भी राहत देने के प्रावधान शामिल हैं, ताकि उत्पादन और आपूर्ति पर असर कम से कम पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार ने साफ किया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जाएंगे।

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