इंदौर में एक ओर नगर निगम भीषण गर्मी और जल संकट के बीच नागरिकों से पानी बचाने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई गरीब बस्तियां आज भी टैंकरों के सहारे जीवन जी रही हैं। ऐसे समय में निपानिया क्षेत्र की कुछ संपन्न सोसायटियों में टैंकर के पानी से फर्श और परिसर की धुलाई कराया जाना अत्यंत चिंताजनक है। जब जरूरतमंद परिवार पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब इस प्रकार जल का अपव्यय सामाजिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
नगर निगम की जिम्मेदारी केवल पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसके सही उपयोग की निगरानी करना भी है। यदि जल संकट वास्तविक है, तो नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। जल संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं, सामूहिक उत्तरदायित्व है। पानी जीवन है, प्रदर्शन का साधन नहीं। यदि आज भी समाज नहीं चेता, तो आने वाला समय और अधिक कठिन होगा।

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