प्रणव बजाज
सरकार का फोकस टैक्स रिफॉर्म्स पर होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण टैक्सपेयर्स के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स ने सरकार को इस बारे कुछ सलाह दी है। पिछले कुछ सालों में सरकार का फोकस टैक्सपेयर्स को राहत देने, कंप्लायंस बढ़ाने और नियमों को आसान बनाने पर रहा है।वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2025 में टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा दिया था। उन्होंने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी। यूनियन बजट 2024 में वित्तमंत्री ने कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव किया था। इससे टैक्सपेयर्स को काफी राहत मिली है। यूनियन बजट 2020 में उन्होंने इनकम टैक्स की नई रीजीम का ऐलान किया था। बाद में नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए इसमें 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया था।
क्रिप्टोकरेंसी इनवेस्टर्स को टैक्स में मिल सकती है राहत
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण क्रिप्टोकरेंसी इनवेस्टर्स के लिए इस बार बड़ा ऐलान कर सकती हैं। क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री ने सरकार को अपनी मांगों के बारे में बताया है। सरकार ने यूनियन बजट 2022 में क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगाने का ऐलान किया था। क्रिप्टोकरेंसी पर दो तरह से टैक्स लगाया गया था। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) से जुड़े ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस लगाया गया था। दूसरा, क्रिप्टोकरेंसी से हुए मुनाफे पर एक समान 30 फीसदी का टैक्स लगाया गया था। क्रिप्टो इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार इस बार बजट में क्रिप्टो इनवेस्टर्स को टैक्स में राहत देगी।
शेयर और इक्विटी एमएफ पर टैक्स-फ्री एलटीसीजी की लिमिट बढ़ सकती है
सरकार ने यूनियन बजट 2024 में स्टॉक्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस लिमिट को बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक कर सकती है। अभी एक वित्त वर्ष में टैक्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से हुए 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं लगता है। इस लिमिट के बढ़ने से म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम और शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी।
नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ सकती है
इनकम टैक्स की नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट 4,00,000 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 4 लाख रुपये तक है तो उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इस लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की जरूरत है। इससे टैक्सपेयर्स को काफी फायदा होगा। खासकर कम इनकम वाले लोगों को इससे राहत मिलेगी।
नई रीजीम में भी टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन
टैक्स एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि सरकार इनकम टैक्स की नई रीजीम में भी टर्म लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन की इजाजत देगी। अभी इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में दोनों पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है। सेक्शन 80सी के तहत टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।
डेट म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को टैक्स में मिल सकती है राहत
यूनियन बजट 2026 में सरकार डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 अप्रैल, 2023 से डेट म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स के नए नियम लागू हो गए हैं। अब डेट म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेचने से हुए कैपिटल गेंस को सिर्फ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है। इस पर इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इससे डेट फंड्स मिलने वाले रिटर्न में कमी आई है। इससे इस फंड में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी भी घटी है। सरकार यूनियन बजट में डेट फंड्स के इनवेस्टर्स को टैक्स में राहत दे सकती है।

Post a Comment