दिल्ली : केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि स्लम में रहने वाले लोगों रिहैबिलिटेट करने का काम उनका काम नहीं है। राज्यसभा में ये मामला टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने उठाया। उन्होंने दिल्ली के वसंत कुंज की जयहिंद प्रवासी कॉलोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कामगार दशकों से रह रहे हैं । लेकिन उन्हें पीएम आवास योजना से हटाया गया है । उन्होंने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री से पूछा कि सरकार के पास शहरी इलाकों में स्लम में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए सस्ते मकानों के लिए क्या योजना है ?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिया जवाब
इस सवाल के जवाब में केंद्रीय आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भूमि और उपनेविशिकरण (लैंड और कोलानाइजेशन ) ये राज्यों के क्षेत्राधिकार से जुड़े हैं और इसमें हर प्रकार की जिम्मेदारी राज्यों की होती है। इस दौरान टीएमसी सांसदों ने हंगामा किया। खट्टर ने कहा कि केंद्र का काम नई गाइडलाइंस, तकनीक जारी करना होता है, इसके तहत राज्यों से हर तरह की मांगें भी पूछी जाती है।
उन्होंने कहा कि पीएम आवास योजना में चार तरह के वर्टिकल हैं । जिस तरह की डिमांड आती है, उसी के मुताबिक सहायता प्रदान की जाती है। खट्टर ने आगे कहा कि स्लम में रहने वाले लोगों का 2011 में एक एनएसओ सर्वे हुआ , जिसके मुताबिक देश में 6 करोड़ 54 लाख लोग स्लम में रहते हैं।
पीएम आवास योजना में दो वर्टिकल
उस सर्वे के बाद पीएम आवास योजना के दो वर्टिकल के तहत इन लोगों को मकान दिए जाने के दिशानर्देश दिए गए थे। हालांकि साल 2020 में एक और सर्वे हुआ था कि कुछ मकान खाली हैं, जिनका अलॉटमेंट नहीं हुआ था। राज्यों की ओर से बताया गया कि80 हजार ऐसे मकान चिह्नित हुए थे जिसमें से 13, हजार मकान इन लोगों को दिए जा सकते हैं, बाकी रहने लायक नहीं थे। इन मकानों का आकार भी छोटा था।जानकारी के मुताबिक 13 हजार में साढ़े पांच हजार मकानों में लोग रह रहे हैं। इस दौरान मंत्री ने पश्चिम बंगाल का भी जिक्र किया, तो टीएमसी सांसद हंगामा करने लगे। जिस पर खट्टर ने कहा कि इस विषय के बारे में केंद्र के पास अलग से योजना नहीं है, गरीब लोगों को इन्हीं चार केवल कंपोनेट में बसाया जा सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह की जानकारियां केंद्र अपने पास नहीं रखता। क्योंकि लैंड और कोलोनाइजेशन का काम राज्य सरकारों का है। हमारा काम नहीं है।

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