हैदराबाद। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच Form-7 को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि भाजपा और संघ परिवार से जुड़े लोग Form-7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश कर रहे हैं। ओवैसी ने चुनाव आयोग और तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से ऐसे आवेदनों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
ओवैसी का दावा है कि हैदराबाद के मुशीराबाद में भाजपा के एक बूथ स्तर के एजेंट ने मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form-7 दाखिल किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आवेदन किसने जमा किए, इसकी जांच क्यों नहीं हो रही। ओवैसी ने चेतावनी दी है कि यदि कथित तौर पर गलत Form-7 दाखिल करने का सिलसिला नहीं रुका तो बड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
हालांकि, इन आरोपों को भाजपा ने सीधे खारिज करते हुए सबूत की मांग की है। तेलंगाना भाजपा प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने कहा कि यदि ओवैसी के पास चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सक्षम अधिकारियों या न्यायिक मंच के सामने पेश करना चाहिए। भाजपा का कहना है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी को चुनावी तथ्य नहीं माना जा सकता।
आधिकारिक तौर पर Form-7 किसी भी मतदाता को मौजूदा मतदाता सूची में नाम हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने या निर्धारित परिस्थितियों में नाम हटाने का आवेदन देने की सुविधा देता है। गलत घोषणा करना कानून के तहत दंडनीय भी है।
इस पूरे विवाद में असली सवाल अब यही है—कथित Form-7 आवेदनों के पीछे कौन है और क्या उनके आधार पर वास्तव में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए? इसका जवाब जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आएगा।

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