दुनिया के तेल बाजार में इस समय कच्चे तेल से ज्यादा डीजल, पेट्रोल और जेट फ्यूल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। चीन, रूस और अमेरिका की नीतियों में बदलाव के बीच वैश्विक ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ा है। 2 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
चीन ने अक्टूबर में हांगकांग और मकाऊ को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में तेल उत्पादों के निर्यात को रोक दिया है। Reuters के अनुसार, चीनी रिफाइनरियों ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की कुछ खेपें भी रद्द की हैं। बीजिंग का उद्देश्य घरेलू ईंधन भंडार को मजबूत रखना बताया जा रहा है। यह रोक 7 अक्टूबर के बाद जारी रहेगी या नहीं, यह घरेलू स्टॉक और रिफाइनिंग उत्पादन पर निर्भर करेगा।
दूसरी ओर रूस ने अपना डीजल निर्यात प्रतिबंध अक्टूबर के अंत तक बढ़ा दिया है। रूस पहले से ही दुनिया के बड़े डीजल निर्यातकों में शामिल है, इसलिए उसकी आपूर्ति पर रोक का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ रहा है।
अमेरिका में भी डीजल निर्यात पर संभावित रोक की चर्चा है, हालांकि फिलहाल कोई अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। भारत के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा कारोबार करती हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में डीजल और अन्य रिफाइंड ईंधनों की कीमतों तथा भारत के पेट्रोलियम बाजार पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर देखने को मिल सकता है।

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