भारतीय नौसेना की पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने की दिशा में Project-75(I) अहम चरण में पहुंच गया है। इस परियोजना के तहत भारत में छह नई आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है। रक्षा मंत्रालय ने 2021 में इस कार्यक्रम के लिए करीब 43,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर प्रस्ताव जारी किया था, जबकि समय के साथ परियोजना की अनुमानित लागत बढ़कर 80,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
Project-75(I) के तहत बनने वाली पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक शामिल होगी। इसका उद्देश्य पनडुब्बियों की पानी के भीतर लंबे समय तक संचालन क्षमता बढ़ाना है। परियोजना को रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत भारत में बनाया जाना है, जिसमें भारतीय कंपनी विदेशी तकनीकी साझेदार के साथ काम करेगी।
इसके साथ ही तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद का प्रस्ताव भी पहले ही रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से आवश्यकता की स्वीकृति प्राप्त कर चुका है। इन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में बनाया जाना है।
मौजूदा Project-75 के तहत छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां भारतीय नौसेना को मिल चुकी हैं। इनमें INS वाग्शीर जनवरी 2025 में छठी और अंतिम पनडुब्बी के रूप में शामिल हुई।
नई परियोजनाओं का लक्ष्य भारत में पनडुब्बी निर्माण क्षमता, स्वदेशी तकनीक और रक्षा उत्पादन से जुड़े औद्योगिक ढांचे को मजबूत करना है।

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