भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार चार कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने ₹35,000 करोड़ से अधिक की इक्विटी बेची। इस दौरान बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार कमजोरी देखने को मिली और बाजार पूंजीकरण में करीब ₹20 लाख करोड़ की कमी का दावा किया गया है।
बिकवाली का असर खास तौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। विदेशी पूंजी के लगातार बाहर निकलने से बाजार में खरीदारी का संतुलन बिगड़ा और सेंसेक्स तथा निफ्टी पर दबाव बढ़ा। निवेशकों के लिए लगातार गिरावट वाला यह दौर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के समय में आईपीओ बाजार में मजबूत गतिविधि के बीच शेयर बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिला था।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे वैश्विक बाजारों की स्थिति, डॉलर और रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें तथा कंपनियों के मूल्यांकन जैसे कई कारक प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि किसी एक कारण को पूरी बिकवाली के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अल्प अवधि में बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन जैसे घरेलू कारक भी बाजार की चाल तय करते हैं। ऐसे में लगातार चार दिन की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब अगले कारोबारी सत्रों में FII प्रवाह और घरेलू निवेशकों की खरीदारी पर रहेगी।

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