भोपाल। राजधानी के नए भोपाल विकास योजना-2047 में 27 प्रतिशत हरित क्षेत्र का दावा किया गया है, लेकिन योजना के पूरे क्षेत्र का आंकड़ा देखने पर तस्वीर काफी अलग नजर आती है। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार पूरे 1,01,690 हेक्टेयर के योजना क्षेत्र में वास्तविक हरित क्षेत्र करीब 14.45 प्रतिशत, जबकि ईएसजेड को जोड़ने पर यह करीब 16.22 प्रतिशत बैठता है।
सबसे बड़ा सवाल आम नागरिकों के लिए उपलब्ध पार्कों को लेकर है। योजना में पार्कों के लिए सिर्फ 670.93 हेक्टेयर, यानी पूरे योजना क्षेत्र का लगभग 0.66 प्रतिशत हिस्सा बताया गया है। 45 लाख की अनुमानित आबादी के हिसाब से यह प्रति व्यक्ति करीब 1.5 वर्ग मीटर पार्क क्षेत्र बैठता है।
आंकड़ों की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि प्रस्तावित ग्रीन क्षेत्र के 9,208 हेक्टेयर यानी करीब 63 प्रतिशत हिस्से में नगर वन और वनीकरण की G-5 श्रेणी शामिल है। सवाल यही है कि पहले से मौजूद जंगल और वन भूमि को कुल हरित क्षेत्र में शामिल करके 27 प्रतिशत का आंकड़ा पेश करने से शहर के नागरिकों को वास्तव में कितनी नई हरियाली मिलेगी?
वहीं, सरकार के आधिकारिक प्रारूप में 2047 तक हरित क्षेत्र बढ़ाने, भोजताल, जंगल, पहाड़ियों, तालाबों और जलस्रोतों के संरक्षण का प्रस्ताव है। प्रारूप पर आम नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं।
अब असली परीक्षा आंकड़ों की नहीं, जमीन पर दिखने वाली हरियाली की है—क्या भोपाल को नए पार्क मिलेंगे या 27 प्रतिशत का बड़ा हिस्सा कागजी आंकड़ों में ही सिमट जाएगा?

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