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बालाघाट चावल घोटाले में कावरे परिवार तक पहुंची SIT की जांच, राजकुमार कावरे भोपाल से गिरफ्तार

 

बालाघाट/भोपाल। एथेनॉल उत्पादन के लिए सरकारी चावल आवंटन से जुड़े बालाघाट के कथित करोड़ों रुपये के घोटाले में जांच का दायरा अब राजनीतिक रूप से प्रभावशाली कावरे परिवार तक पहुंच गया है। एसआईटी ने पूर्व मंत्री एवं भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे के बड़े भाई राजकुमार कावरे को भोपाल से गिरफ्तार किया है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह मामले में 20वीं गिरफ्तारी बताई गई है


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मामले की शुरुआत जून 2026 में सरकारी चावल की ऐसी खेप से हुई, जिसे कागजों में छिंदवाड़ा स्थित एथेनॉल प्लांट तक पहुंचना था। जांच और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ चावल निर्धारित प्लांट तक पहुंचने के बजाय निजी राइस मिलों में खपाए जाने का आरोप सामने आया। NDTV की जांच में एक ट्रक में लदे 242.55 क्विंटल सरकारी चावल के निर्धारित प्लांट तक नहीं पहुंचने का मामला भी सामने आया था। 


एसआईटी की कार्रवाई में अब तक कावरे परिवार से जुड़े अविनाश कावरे की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। राजकुमार कावरे की टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस मिल को भी जांच से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार उनके बिजनेस पार्टनर विनोद शर्मा और अन्य आरोपितों से पहले ही पूछताछ/गिरफ्तारी की कार्रवाई हो चुकी है। 


इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी एथेनॉल प्लांट, राइस मिल संचालकों, ट्रांसपोर्टरों और सरकारी एजेंसियों के बीच कथित लेनदेन की है। एसआईटी ने हाल ही में तीन आरोपितों के खिलाफ करीब 2,000 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की है, जिसमें कथित फर्जी बिलिंग और चावल की आवाजाही से जुड़े दस्तावेजों का उल्लेख है। 


अगस्त में जांच FCI तक भी पहुंची थी और एक FCI कर्मचारी की गिरफ्तारी की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि जांच केवल निजी राइस मिलों तक सीमित नहीं रही। 


अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी चावल की वास्तविक मात्रा कितनी थी, कितने चावल की हेराफेरी हुई, एथेनॉल प्लांट तक कितनी खेप वास्तव में पहुंची और इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी तंत्र की भूमिका क्या रही। इन सवालों का अंतिम जवाब जांच और अदालत की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा। कावरे परिवार के जिन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, उन पर लगे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं; गिरफ्तारी अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है।


रिपोर्टिंग नोट: आपके दिए इनपुट में “कुमार कावरे” लिखा है, लेकिन 20 सितंबर की ताजा प्रकाशित रिपोर्टों में नाम “राजकुमार कावरे” दिया गया है। इसलिए खबर में मैंने राजकुमार कावरे नाम इस्तेमाल किया है।

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