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RBI ने ₹50 हजार करोड़ की नकदी खींची, सरकारी बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त पैसा निकाला

बौद्धिक प्रतिकार | बिजनेस



बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 17 सितंबर को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत ₹50,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचकर इतनी ही राशि की रुपये वाली तरलता बैंकिंग सिस्टम से खींच ली। यह सितंबर में प्रस्तावित ₹1 लाख करोड़ की OMO बिक्री की पहली बड़ी किस्त है।


RBI ने अलग-अलग अवधि वाले सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री की। इसमें सबसे बड़ी स्वीकृति 8.28% GS 2032 के लिए ₹18,840 करोड़ की रही। इसके अलावा 2029 से 2031 तक मैच्योर होने वाली कई अन्य सरकारी प्रतिभूतियों को भी नीलामी में स्वीकार किया गया।


इस कदम की पृष्ठभूमि में बैंकिंग सिस्टम में असामान्य रूप से बढ़ी लिक्विडिटी है। 16 सितंबर तक अतिरिक्त तरलता करीब ₹7.38 लाख करोड़ आंकी गई थी। इसका एक बड़ा कारण FCNR(B) जमा के जरिए विदेशी मुद्रा का बड़ा प्रवाह और उसके बाद RBI के साथ हुए लेनदेन से बैंकों में आई रुपये की तरलता बताया गया है। महीने के अंत में सरकारी खर्च, वेतन और पेंशन भुगतान ने भी सिस्टम में नकदी बढ़ाई।


RBI की योजना केवल ₹50,000 करोड़ तक सीमित नहीं है। 21 सितंबर और 28 सितंबर को ₹25,000 करोड़ की दो और OMO बिक्री प्रस्तावित हैं। यानी सितंबर में कुल ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने की योजना है।


इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि जनता के बैंक खातों से पैसा निकाल लिया गया है। OMO में RBI सरकारी प्रतिभूतियां बेचता है और खरीदार उसके बदले भुगतान करते हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध रुपये की अतिरिक्त तरलता घटती है। इसका उद्देश्य बाजार में नकदी की स्थिति और अल्पकालिक ब्याज दरों को मौद्रिक नीति के अनुरूप रखने में मदद करना है।

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