Top News
Loading...

दतिया विधायक की जीत पर कानूनी सवाल, हलफनामे में पुरानी FIR छिपाने का आरोप

 

1991 के मामले का जिक्र नहीं करने का आरोप, निर्वाचन रद्द करने की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंची याचिका


दतिया। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की विधानसभा में वापसी के साथ ही उनके निर्वाचन को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। चुनावी हलफनामे में वर्ष 1991 में दर्ज एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी कथित तौर पर नहीं देने का आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की गई है। याचिका में विधायक का निर्वाचन निरस्त करने की मांग की गई है।



याचिकाकर्ता भाजपा नेता एवं अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से याचिका दायर की है। याचिका के मुताबिक जुलाई 2026 के दतिया विधानसभा उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने अपने शपथपत्र में दो लंबित आपराधिक मामलों का उल्लेख किया, लेकिन 1991 में दर्ज एक अन्य FIR की जानकारी नहीं दी। दावा है कि यह प्रकरण तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम से जुड़ा था तथा उस मामले में कई लोगों के साथ घनश्याम सिंह का नाम भी दर्ज था।


अब बड़ा सवाल यही है कि यदि यह मामला रिकॉर्ड में था तो चुनावी हलफनामे में उसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया? क्या उम्मीदवार को पुराने आपराधिक प्रकरण की जानकारी नहीं थी या फिर यह जानकारी किसी कारण से शपथपत्र में शामिल नहीं हुई?


हालांकि, याचिका दाखिल होना दोष सिद्ध होना नहीं है। इस मामले में हलफनामे की वास्तविक जानकारी, पुराने प्रकरण की स्थिति और कानूनी दायित्वों की व्याख्या हाईकोर्ट के समक्ष तय होगी। अदालत के फैसले तक विधायक का निर्वाचन वैध है।

Post a Comment

Previous Post Next Post