नई दिल्ली। जमानत के मामलों में जांच अधिकारियों द्वारा सरकारी वकील को समय पर जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि इस तरह की लापरवाही यह सवाल खड़ा करती है कि पुलिस व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है।
मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) की धारा 22 और 29 के तहत दर्ज FIR से जुड़ी दो जमानत याचिकाओं का है। कोर्ट ने पाया कि दोनों मामले पिछले साल दिसंबर से अलग-अलग पीठों के सामने लंबित थे और बाद में सुनवाई के लिए इस पीठ के पास आए। इसके बावजूद जांच अधिकारियों ने सुनवाई शुरू होने तक सरकारी वकील यानी APP को मामलों की पर्याप्त जानकारी नहीं दी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि एक सह-आरोपी को अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। उस आदेश में दर्ज परिस्थितियां मौजूदा जमानत याचिकाओं के लिए भी महत्वपूर्ण थीं, लेकिन पुलिस की ओर से समय पर जानकारी नहीं मिलने के कारण APP अदालत के सामने इस पहलू पर प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रख सके।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में या तो आरोपियों को तुरंत जमानत दी जाए या सुनवाई टालकर उनकी हिरासत और लंबी की जाए। अंततः कोर्ट ने संबंधित DCP को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जांच एजेंसी का पक्ष सरकारी वकील को समझाने का निर्देश दिया। यदि DCP पेश नहीं होते या पहले से APP को जानकारी उपलब्ध नहीं कराते, तो कोर्ट इसे दोनों आरोपियों की तत्काल जमानत पर रिहाई के पक्ष में राज्य की मंशा के रूप में देखेगा। आदेश की प्रति पुलिस कमिश्नर को भी भेजने को कहा गया।

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