भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से सीमा विवाद के साथ कारोबारी तनाव भी बड़ा मुद्दा रहा है। अब दोनों देशों के बीच आर्थिक मोर्चे पर बातचीत आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। 14 सितंबर को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ के बीच बातचीत हुई, जिसमें व्यापार और आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दों को संतुलित तरीके से सुलझाने पर सहमति बनी।
इससे पहले 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की BRICS सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार तक बेहतर पहुंच जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया था।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा है। भारतीय उद्योग लंबे समय से चीनी बाजार में पहुंच और गैर-टैरिफ बाधाओं को लेकर सवाल उठाता रहा है। दूसरी ओर चीन भारतीय बाजार में अपनी कंपनियों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल की अपेक्षा रखता है।
हालांकि बातचीत को रिश्तों में सुधार का संकेत माना जा सकता है, लेकिन इसे तनाव की समाप्ति कहना जल्दबाजी होगी। सीमा पर शांति, सुरक्षा संबंधी भरोसा और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत यह तय करेगी कि हाल की कूटनीतिक गर्माहट वास्तविक कारोबारी बदलाव में बदलती है या सिर्फ संवाद तक सीमित रहती है।

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