अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में जमीन की एक बेहद संकरी पट्टी है, जिसे वाखान कॉरिडोर (Wakhan Corridor) कहा जाता है। यह इलाका अफगानिस्तान को चीन के शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ता है और इसके बीच में वाखान की पहाड़ी घाटियां आती हैं। करीब 200 किलोमीटर से अधिक लंबा यह संकरा भू-भाग भौगोलिक रूप से अफगानिस्तान के बाकी हिस्सों से अलग दिखाई देता है।
वाखान कॉरिडोर का मौजूदा स्वरूप मुख्य रूप से 19वीं सदी के ब्रिटिश-रूसी ‘ग्रेट गेम’ की भू-राजनीति का परिणाम माना जाता है। उस दौर में ब्रिटिश भारत और रूसी साम्राज्य मध्य एशिया में प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा में थे। दोनों शक्तियां सीधे एक-दूसरे की सीमा से टकराने से बचना चाहती थीं।
इसी रणनीतिक परिस्थिति में अफगानिस्तान को एक बफर क्षेत्र के रूप में बनाए रखने और ब्रिटिश भारत तथा रूसी प्रभाव वाले क्षेत्रों के बीच दूरी कायम रखने के लिए सीमाओं का निर्धारण किया गया। वाखान की संकरी पट्टी ने अफगानिस्तान को तत्कालीन रूसी क्षेत्र से अलग रखा और चीन से उसकी छोटी सीमा भी बनी रही।
आज यह क्षेत्र बेहद दुर्गम पहाड़ों, ऊंचाई और कम आबादी के लिए जाना जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण वाखान कॉरिडोर का रणनीतिक महत्व अब भी बना हुआ है। हाल के वर्षों में चीन की अफगानिस्तान के साथ बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक सक्रियता ने भी इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में बनाए रखा है।

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