ईरान का दो टूक संदेश: जंग के लिए तैयार, बातचीत का दरवाजा भी खुला; होर्मुज पर अटका संकट



तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सैन्य टकराव की आशंका के साथ कूटनीतिक रास्ते की संभावना भी बनी हुई है। तेहरान ने संकेत दिया है कि वह दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है, लेकिन बातचीत के रास्ते को भी पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। इस पूरे संकट में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे बड़ा रणनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है।


ईरान का कहना है कि किसी भी वार्ता का आधार उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय हित होंगे। तेहरान विशेष रूप से यह स्पष्ट करना चाहता है कि बातचीत सैन्य दबाव या धमकी के माहौल में नहीं हो सकती। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अपनी चिंताएं लगातार सामने रख रहा है।


होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि फारस की खाड़ी से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक तेल कीमतों पर असर डाल सकता है।


ईरान ने अतीत में कई बार संकेत दिया है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों में होर्मुज को लेकर उसके पास विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, जलडमरूमध्य को लेकर किसी भी कदम के व्यापक आर्थिक और सामरिक परिणाम हो सकते हैं।


फिलहाल तेहरान का संदेश दोहरा है—सैन्य दबाव का जवाब देने की तैयारी भी और बातचीत की संभावना भी। असली सवाल यही है कि दोनों पक्ष ऐसी शर्तों पर कैसे पहुंचेंगे जिन्हें स्वीकार किया जा सके।

Post a Comment

Previous Post Next Post