जबलपुर । बौद्धिक प्रतिकार
परीक्षा शुरू होने में महज एक घंटा बाकी था और चार छात्रों के सामने परीक्षा से बाहर होने का संकट खड़ा था। ऐसे में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के MSW छात्रों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ का दरवाजा खटखटाया। मामले की तात्कालिकता देखते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने तत्काल सुनवाई की और छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के निर्देश जारी कर दिए।
मामला फीस भुगतान से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं शिवांकी तिवारी, राहुल दुबे, रितेश कुमार पांडे और तौफीक का कहना था कि उन्हें मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत प्रवेश मिला है। योजना के अनुसार पात्र पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों से मेस खर्च और कॉशन मनी ली जाती है, जबकि एडमिशन, एनरोलमेंट और परीक्षा शुल्क का भुगतान राज्य सरकार को करना था। विश्वविद्यालय की ओर से फीस का भुगतान नहीं होने के कारण छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।
छात्रों की ओर से अधिवक्ता देवेंद्र कुमार कुशवाहा और अंजलि तिवारी ने गुरुवार को याचिका दाखिल कर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। परीक्षा दोपहर 12 बजे शुरू होनी थी और करीब 11 बजे कोर्ट ने विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को बुलाकर छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि फीस भुगतान को लेकर विश्वविद्यालय और सरकार के बीच विवाद का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए। विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है। अंतिम फैसला याचिका के परिणाम पर निर्भर रहेगा।

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