पटना। बिहार में नाबालिग लड़कियों से जुड़े कथित शोषण और दुर्व्यवहार के मामलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जमुई, समस्तीपुर और बांका में सामने आए मामलों के बाद विपक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने बांका की घटना को लेकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या इस मामले में भी प्रतिक्रिया देने से पहले पीड़ितों की जाति देखी जाएगी। उनका यह बयान उन आरोपों के संदर्भ में आया है, जिनमें सत्ता पक्ष के नेताओं पर अलग-अलग घटनाओं में प्रतिक्रिया देते समय राजनीतिक या सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया जाता रहा है।
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा (रामविलास) नेता चिराग पासवान ने नाबालिगों से जुड़े मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं बिहार के लिए चिंता और शर्म की बात हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का अपराध स्वीकार्य नहीं हो सकता और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
जमुई, समस्तीपुर और बांका की घटनाओं ने एक साथ राज्य में महिला एवं बाल सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस खड़ी कर दी है। अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच बड़ा सवाल यही है कि जांच कितनी तेजी से होती है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

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