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यूपी राज्यसभा चुनाव में 8-2 का गणित, तीसरी सीट के लिए सपा को चाहिए 16 और वोट

 

10 सीटों पर मुकाबला; 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट से एक सीट, भाजपा के पास सहयोगियों समेत करीब 294 का आंकड़ा


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव का गणित सामने आते ही विधानसभा का संख्याबल चर्चा के केंद्र में आ गया है। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से सपा दो और भाजपा आठ सीटों के लिए जरूरी संख्या जुटाने की स्थिति में है। एक राज्यसभा सीट के लिए प्रथम वरीयता के करीब 37 वोट चाहिए।



सपा के पास वर्तमान में 97 विधायक बताए गए हैं, लेकिन पार्टी दो विधायकों को अपने प्रभावी आंकड़े में शामिल नहीं मान रही है। ऐसे में करीब 95 विधायकों के आधार पर दो सीटों के बाद उसके पास 21 वोट बचने का अनुमान है। तीसरी सीट के लिए उसे करीब 16 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।


यहीं से चुनाव का दिलचस्प गणित शुरू होता है। सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो उसे विपक्षी खेमे के अतिरिक्त वोटों के साथ-साथ क्रॉस-वोटिंग या दूसरे विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी तीसरा प्रत्याशी पीडीए पृष्ठभूमि से उतारने की तैयारी में है। हालांकि अतिरिक्त 16 वोट जुटना अभी राजनीतिक संभावना है, सुनिश्चित संख्या नहीं।


दूसरी ओर भाजपा के 256 विधायक हैं। निषाद पार्टी के 5, अपना दल (एस) के 13, रालोद के 9 और सुभासपा के 6 विधायकों के अलावा कुछ निर्दलीय तथा जनसत्ता दल के विधायकों के समर्थन को मिलाकर भाजपा का आंकड़ा करीब 294 बताया गया है। आठ सीटों के लिए 296 वोट चाहिए, इसलिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।


अब निगाहें प्रत्याशियों के ऐलान और 37 वोटों के इस गणित को मतदान के दिन कौन कितना बदल पाता है, इस पर रहेंगी। राज्यसभा चुनाव में वरीयता आधारित मतदान होने के कारण अंतिम तस्वीर केवल दलों की घोषित संख्या से नहीं, मतदान और मतगणना के दौरान बने समीकरणों से साफ होगी।

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