नई दिल्ली । बौद्धिक प्रतिकार
सरकारी दफ्तरों में पड़े पुराने कबाड़, बेकार उपकरण और अनुपयोगी सामान को हटाने के अभियान ने सरकार को बड़ी रकम दिलाई है। स्वच्छता अभियान के तहत अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में लंबे समय से जमा अनुपयोगी सामग्री की पहचान कर उसे नीलाम किया गया। इससे अब तक 5,102 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने का दावा किया गया है।
अभियान का असर सिर्फ कबाड़ हटाने तक सीमित नहीं रहा। वर्षों से सरकारी कार्यालयों में जमा फाइलों और पुराने रिकॉर्ड की भी छंटाई की गई। बड़ी संख्या में ऐसी फाइलें निपटाई गईं, जिनका काम पूरा हो चुका था और जिन्हें रिकॉर्ड प्रबंधन के नियमों के तहत हटाया जा सकता था। इससे कार्यालयों में जगह खाली हुई और दस्तावेजों के रखरखाव का बोझ भी कम हुआ।
सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया से दफ्तरों का माहौल अधिक व्यवस्थित हुआ और कर्मचारियों के लिए काम करने की जगह बढ़ी। साथ ही अनुपयोगी सामान को सरकारी संपत्ति के रूप में पड़े रहने देने के बजाय उससे आय अर्जित की गई।
हालांकि सवाल यह भी है कि वर्षों तक यह कबाड़ सरकारी परिसरों में जमा क्यों होता रहा और समय-समय पर इसकी नीलामी क्यों नहीं की गई? 5,102 करोड़ की कमाई के साथ यह अभियान सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर भी बड़ा सवाल छोड़ता है।

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