हिंदू पंचांग के अनुसार 29 सितंबर 2026 को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को विघ्नों का नाश करने वाला और शुभ कार्यों का आरंभ कराने वाला देवता माना गया है। विघ्नराज गणेश को अष्टविनायक के सातवें स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक गणेश जी की आराधना करने से बाधाओं से मुक्ति और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उन्हें दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, फल और मोदक या लड्डू अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान दीपक जलाकर गणेश जी का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
गणेश पूजन में ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा गणेश जी की आरती और गणेश स्तुति का पाठ भी किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन एवं पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गणेश जी की पूजा विशेष रूप से विघ्नों को दूर करने, कार्यों में सफलता और परिवार की मंगलकामना के लिए की जाती है। व्रत और पूजा की स्थानीय परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने क्षेत्र की पंचांग परंपरा के अनुसार चंद्रोदय और पारण का समय देखना उचित रहेगा।

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