नई दिल्ली। भारत में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और दूसरे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने का अनुमान है। CII और Boston Consulting Group (BCG) की 24 सितंबर 2026 को जारी संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक ₹3 लाख करोड़ से ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इसके लिए बाजार के सालाना 8–10 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस विस्तार के पीछे केवल बढ़ती आय नहीं, बल्कि परिवारों में बदलाव, आसान फाइनेंस, बेहतर वितरण नेटवर्क, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग और कई श्रेणियों में अभी भी कम घरेलू पहुंच प्रमुख कारण हैं। बड़े घरेलू उपकरणों की भारत में पहुंच कई क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में अभी काफी कम है, इसलिए मांग बढ़ने की बड़ी गुंजाइश बनी हुई है।
लेकिन इस बढ़ते बाजार के साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है—इस कमाई का कितना हिस्सा भारत में बनेगा और कितना आयात के जरिए बाहर जाएगा? BCG-CII का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में घरेलू मटेरियल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से ₹40,000–50,000 करोड़ की अतिरिक्त वैल्यू-एडिशन की संभावना बन सकती है।
फिलहाल टीवी डिस्प्ले पैनल, एयर-कंडीशनर कंप्रेसर, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में आयात पर निर्भरता चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट में घरेलू कंपोनेंट निर्माण, R&D, तकनीकी साझेदारी, AI और निर्यात क्षमता बढ़ाने को अगले चरण की प्रमुख जरूरत बताया गया है।
यानी आने वाला दशक सिर्फ ज्यादा सामान खरीदने का नहीं, बल्कि यह तय करने का भी होगा कि भारतीय उपभोक्ता की बढ़ती जेब का फायदा भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को कितना मिलता है।

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