नई दिल्ली। UPI भुगतान को लेकर चल रही बहस के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि नए Merchant Discount Rate (MDR) का सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। सरकार के अनुसार, UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
नए ढांचे के तहत ₹2,000 तक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।
सरकार का कहना है कि MDR कोई टैक्स या उपभोक्ता शुल्क नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी यह लागत ग्राहकों से अलग से न वसूलें। UPI ऐप प्रदाताओं को भी छिपा शुल्क लगाने से रोका गया है।
छोटे व्यापारियों को भी राहत दी गई है। QR कोड के जरिए महीने में ₹1 लाख तक UPI प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के भुगतान पर जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक करीब 96% P2M UPI लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
यानी आम ग्राहक के लिए UPI भुगतान की लागत में सीधे बढ़ोतरी का प्रावधान नहीं है, जबकि बड़े व्यापारी भुगतानों के लिए MDR की नई व्यवस्था लागू होगी।

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