इंदौर। विशेष रिपोर्ट | प्रणव बजाज
स्पेस पार्क फेज-2 के करीब दो दशक पुराने आशियानों पर अचानक नीलामी का खतरा मंडराने से रहवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस कर्ज की जानकारी मकान खरीदते समय नहीं दी गई, उसका बोझ आज खरीदार क्यों उठाएं?
10 अगस्त 2026 को डीआरटी जबलपुर की ओर से चस्पा सार्वजनिक नोटिस ने रहवासियों में हड़कंप मचा दिया। नोटिस में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HUDCO) की करीब ₹1.56 करोड़ की बकाया राशि का उल्लेख है। रहवासियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों पहले विधिवत रजिस्ट्री कराकर मकान खरीदे और तब संपत्ति से जुड़े पुराने वित्तीय दायित्वों की पूरी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ती है क्योंकि सार्वजनिक रिकॉर्ड में अरुण डागरिया और अतुल सुराना से जुड़े पुराने जमीन विवाद और धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहे हैं। अप्रैल 2024 की पुलिस संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, लसूड़िया थाने में प्रिंसेस स्टेट कॉलोनी मामले में डागरिया, महेंद्र जैन और सुराना के खिलाफ धारा 420, 409, 120-बी और 34 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। आरोप था कि 24 से अधिक लोगों से राशि लेकर प्लॉट बेचे गए, लेकिन कब्जा नहीं दिया गया।
2021 में भी प्रिंसेस स्टेट कॉलोनी के रहवासियों की शिकायत पर तत्कालीन कलेक्टर ने डागरिया, महेंद्र जैन, अतुल सुराना और अन्य को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। वहीं 2024 की एक रिपोर्ट में अयोध्यापुरी से जुड़ी डागरिया-सुराना की करीब 70 हजार वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री शून्य घोषित होने का भी उल्लेख है।
अब स्पेस पार्क के रहवासी पूछ रहे हैं—क्या जिस जमीन पर मकान बने, वह कभी बंधक थी? बंधक थी तो खरीदारों को जानकारी क्यों नहीं दी गई? और यदि बंधक नहीं थी तो उनकी संपत्ति पर कार्रवाई का आधार क्या है?
5 सितंबर 2026 को अपराध शाखा की ओर से अतुल सुराना को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का नोटिस दिए जाने के बावजूद 7 सितंबर की पेशी में उनके और अरुण डागरिया के उपस्थित नहीं होने का आरोप रहवासियों ने लगाया है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से होना बाकी है।
अब जांच में मूल ऋण दस्तावेज, मॉर्गेज रिकॉर्ड, रजिस्ट्री के समय की स्थिति और खरीदारों को दी गई जानकारी सामने आना जरूरी है। 18 साल से घर में रह रहे परिवारों को पुराने कारोबारी विवाद की कीमत क्यों चुकानी पड़े—यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

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