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मानसून ने दिया झटका! 17 साल बाद देश में सबसे बड़ी बारिश की कमी, MP भी 6% पीछे

नई दिल्ली। मानसून सीजन खत्म होने में अब सिर्फ 9 दिन बाकी हैं और देशभर में बारिश का आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा है। 1 जून से 21 सितंबर तक सामान्य तौर पर 827.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में करीब 703.7 मिमी बारिश दर्ज हुई। यानी सामान्य से 123.5 मिमी यानी 15% कम बारिश हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह 2009 के बाद मानसून में सबसे बड़ी कमी है। 2009 में बारिश सामान्य से 18.3% कम रही थी।



स्थिति का असर मध्यप्रदेश समेत मध्य भारत में भी दिखाई दे रहा है। राजस्थान में बारिश करीब 21% कम, जबकि मध्यप्रदेश में लगभग 6% कमी दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहा है। इन राज्यों में बारिश की कमी का सीधा असर जलाशयों, खेती और आने वाले महीनों की जल उपलब्धता पर पड़ सकता है।


सबसे बड़ा सवाल देश के प्रमुख बांधों को लेकर है। 178 प्रमुख जलाशयों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 21% कम जल भंडारण बताया जा रहा है। जलाशयों में कम पानी का असर सिंचाई के साथ-साथ हाइड्रोपावर उत्पादन पर भी पड़ सकता है।


यही वजह है कि मानसून की कमी अब केवल खेती का मामला नहीं रह गई है। कम बारिश, कम जलाशय और थर्मल प्लांट्स में कोयले के दबाव का असर आने वाले महीनों में बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।


अब मौसम विभाग और सरकार की नजर मानसून के बचे अंतिम दिनों पर है। सवाल यह है कि क्या सितंबर के आखिरी दिनों की बारिश देश के 15% वर्षा घाटे और जलाशयों में बनी कमी को कुछ हद तक भर पाएगी?

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