बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में उन्होंने अपनी नियुक्ति को संवैधानिक बताया है। कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में प्रकाश ने संविधान के अनुच्छेद 164(4) के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप है।
विवाद की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब प्रकाश को पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया था। उस समय वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। अप्रैल 2026 में सरकार बदलने के बाद उन्हें मई में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में दोबारा मंत्री बनाया गया। याचिका में इसी पुनर्नियुक्ति को चुनौती दी गई है और दावा किया गया है कि गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने की संवैधानिक सीमा लागू होती है।
प्रकाश की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि उनकी पहली मंत्री नियुक्ति नवंबर 2025 में हुई थी और अनुच्छेद 164(4) में गैर-विधायक मंत्री के लिए छह महीने की व्यवस्था को वे स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि 5 अगस्त 2026 को राज्यपाल ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य नामित किया और 6 अगस्त को उन्होंने शपथ ली। इसलिए वर्तमान स्थिति में वे बिहार विधानमंडल के सदस्य हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि बाद में विधान परिषद सदस्य बन जाना पहले की पुनर्नियुक्ति से जुड़े संवैधानिक विवाद को किस तरह प्रभावित करता है। मामले में अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार है।

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