प्रणव बजाज | विशेष रिपोर्ट
भोपाल। सागर के बंडा-शाहगढ़ इलाके में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया है। रविवार रात जारी आदेश में 10 IPS और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों समेत 137 पुलिस अफसरों के तबादले किए गए हैं। सागर क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पद बदले गए हैं।
खुरई SDOP की जिम्मेदारी अब IPS काजल सिंह को दी गई है। सागर में पदस्थ IPS दीपांशु को मनावर भेजा गया है। रहली SDOP प्रकाश मिश्रा का तबादला बड़ा मलहरा किया गया, जबकि उनकी जगह पूजा शर्मा को भेजा गया। राहतगढ़ में भी SDOP बदले गए हैं। दूसरी ओर टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर और बड़वानी में भी पुलिस अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं।
सरकार का दावा है कि सागर कांड में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के बाद आबकारी विभाग के अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई भी हुई और पुलिस ने अवैध शराब नेटवर्क की जांच तेज की।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—क्या केवल अफसरों के तबादले से वह नेटवर्क खत्म हो जाएगा, जिसने गांवों तक संदिग्ध शराब पहुंचाई? जांच में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। कुछ रिपोर्टों में लाइसेंसी शराब कारोबारी और अन्य आरोपियों के नाम भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है, लेकिन इन आरोपों का अंतिम सच जांच और अदालत से तय होना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल शराब ठेकेदारों, सप्लायरों और कथित माफिया नेटवर्क की जवाबदेही का है। यदि अवैध शराब सीमा पार से सागर तक पहुंची, तो रास्ते में निगरानी तंत्र कहां था? बिक्री किसके संरक्षण में चल रही थी? लाइसेंसी नेटवर्क और अवैध सप्लाई के बीच कोई संबंध था या नहीं? और यदि अधिकारियों को पहले से गतिविधियों की जानकारी थी तो कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं हुई?
मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल यह नहीं कि अफसर कितने बदले गए—सवाल यह है कि शराब के उस पूरे नेटवर्क पर कब और कितनी निर्णायक कार्रवाई होगी, जिसके कारण लोगों की जान गई? सरकार को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि जांच में किस स्तर तक जिम्मेदारी तय हुई और शराब कारोबार से जुड़े प्रभावशाली लोगों पर क्या कार्रवाई हुई।
अफसर बदलना प्रशासनिक फैसला है, लेकिन सागर को जवाब चाहिए—मौतों के लिए जिम्मेदार पूरा नेटवर्क कब टूटेगा?

Post a Comment