नई दिल्ली । बौद्धिक प्रतिकार
धरती के दोनों ध्रुवों पर जमी बर्फ में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ की चादरों से कुल करीब 12 लाख करोड़ टन बर्फ कम होने का आंकड़ा वैश्विक जलवायु संकट की गंभीरता को सामने लाता है। बर्फ के इस नुकसान का सीधा संबंध समुद्र के बढ़ते जलस्तर से है।
ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका दुनिया के सबसे बड़े स्थलीय बर्फ भंडार हैं। इन क्षेत्रों में तापमान बढ़ने के साथ बर्फ पिघलने और समुद्र में पहुंचने की प्रक्रिया तेज होती है। वैज्ञानिक उपग्रहों और अन्य तकनीकों के जरिए इन बर्फ की चादरों के द्रव्यमान में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखते हैं।
बर्फ का नुकसान केवल ध्रुवीय क्षेत्रों तक सीमित चिंता नहीं है। समुद्र का जलस्तर बढ़ने से दुनिया के तटीय शहरों और निचले इलाकों में बाढ़, तटीय कटाव और खारे पानी के जमीन एवं भूजल में प्रवेश का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, 12 लाख करोड़ टन का आंकड़ा किस अवधि में और किस अध्ययन के आधार पर निकाला गया है, यह स्पष्ट करना जरूरी है। बर्फ के नुकसान के आंकड़े अध्ययन की समय-सीमा और मापने की पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
ध्रुवों पर घटती बर्फ इसलिए सिर्फ पर्यावरण की खबर नहीं है। यह सवाल समुद्र के भविष्य, तटीय आबादी और वैश्विक जलवायु व्यवस्था से जुड़ा है—और इसका असर आने वाले दशकों में और स्पष्ट हो सकता है।

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