रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका में बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी संसद में Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ रहा है, जिसमें रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति को शक्ति देने का प्रावधान है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की नियम समिति ने 15 सितंबर को विधेयक को आगे बढ़ाया, अब अंतिम मतदान की प्रक्रिया बाकी है।
इस घटनाक्रम में भारत के लिए खास चिंता की बात यह है कि सदन में पेश एक संशोधन में भारत और चीन समेत कई देशों के नाम सीधे संभावित टैरिफ के दायरे में रखे गए हैं। प्रस्तावित सूची में तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि अंतिम कानून में कौन-कौन से देश रहेंगे, यह आगे होने वाले संशोधनों और मतदान पर निर्भर करेगा।
इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 प्रतिशत अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लागू हो गया है। विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की ओर से कार्रवाई किए जाने के बाद ही इसका वास्तविक प्रभाव स्पष्ट होगा। प्रस्ताव का उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना है, जिसे अमेरिका यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानता है।
भारत के लिए मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूसी कच्चा तेल उसकी ऊर्जा जरूरतों और आयात रणनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है। आगे अमेरिकी संसद में होने वाली वोटिंग और अंतिम विधेयक पर दुनिया की नजर रहेगी।

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