इंदौर में साइबर ठगी के पैसे को फर्जी खातों में घुमाने वाले नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने दीपक राव और गौरव राठौर को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 बैंक खातों में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम पहुंची, जबकि 5 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई है। नेटवर्क के तार 13 राज्यों तक जुड़े होने की बात कही जा रही है।
पुलिस के हाथ लगे 11 एटीएम कार्ड और 8 सिम कार्ड इस पूरे खेल की एक अहम कड़ी माने जा रहे हैं। ऐसे खातों और सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने के लिए किया जाता है। हाल में इंदौर पुलिस ने दूसरे बहुराज्यीय मामलों में भी म्यूल खातों और सिम के इस्तेमाल का खुलासा किया है।
अब असली सवाल सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं है।
10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम आखिर किन-किन खातों में गई?
इन खातों के असली संचालक कौन हैं?
13 राज्यों में बैठे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है?
और फर्जी सिम व बैंक खातों की व्यवस्था करने वाला तंत्र कहां तक फैला है?
इंदौर पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन इस नेटवर्क की पूरी परत तभी खुलेगी जब रकम के अंतिम लाभार्थियों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और देशभर में जुड़े आरोपियों तक जांच पहुंचेगी।
इंदौर पुलिस पहले भी साइबर ठगी के मामलों में बड़ी संख्या में संदिग्ध खातों को फ्रीज कराने और ठगी की रकम वापस कराने की कार्रवाई कर चुकी है।
**10 करोड़ की रकम ने एक बात साफ कर दी है—साइबर ठगी अब अकेले ठग का खेल नहीं, बल्कि खातों, सिम और एटीएम की पूरी समानांतर व्यवस्था बन चुकी है।**

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