भारत और चीन के बीच रक्षा निर्यात की प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है। एक ओर चीन का J-10C लड़ाकू विमान है, तो दूसरी ओर भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल। हालांकि दोनों अलग-अलग श्रेणी के हथियार हैं, लेकिन वैश्विक रक्षा बाजार में दोनों की मांग और निर्यात क्षमता की तुलना लगातार हो रही है।
किसके पास ज्यादा ग्राहक?
J-10C
पाकिस्तान इसका प्रमुख और पुष्टि किया गया ग्राहक है।
इंडोनेशिया और बांग्लादेश के साथ बातचीत और प्रस्तावों की खबरें हैं, लेकिन कई सौदे अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचे हैं।
ब्रह्मोस
फिलीपींस पहला विदेशी खरीदार बना।
इसके बाद वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी समझौते हुए।
यूएई समेत कई अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है और 10 से अधिक देशों ने रुचि दिखाई है।
तकनीक में कौन कितना दमदार?
J-10C
4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान।
एईएसए रडार और लंबी दूरी की PL-15 मिसाइल से लैस।
हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन में सक्षम।
ब्रह्मोस
दुनिया की सबसे तेज़ परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल।
लगभग मैक 2.8 से 3 की रफ्तार।
जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान—चारों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है।
तेज गति के कारण दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को प्रतिक्रिया के लिए बहुत कम समय मिलता है।
रक्षा बाजार में किसकी बढ़त?
मौजूदा स्थिति में ब्रह्मोस निर्यात के मामले में अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। इसके कई पुष्टि किए गए विदेशी ग्राहक हैं और नए देशों से भी लगातार रुचि मिल रही है। दूसरी ओर J-10C को लेकर चर्चा जरूर बढ़ी है, लेकिन पाकिस्तान के अलावा इसके पक्के ग्राहकों की संख्या अभी सीमित है।
निष्कर्ष
दोनों हथियार अपनी-अपनी भूमिका में बेहद सक्षम हैं और उनकी सीधी तकनीकी तुलना पूरी तरह उचित नहीं है, क्योंकि J-10C एक लड़ाकू विमान है जबकि ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल। लेकिन यदि बात रक्षा निर्यात और अंतरराष्ट्रीय मांग की करें, तो हाल के वर्षों में भारत की ब्रह्मोस ने वैश्विक हथियार बाजार में मजबूत पहचान बनाई है और लगातार नए ग्राहक जोड़ती नजर आ रही है।

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