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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस समय गंभीर स्थिति बन गई, जब एक वकील ने अदालत के समक्ष सोशल मीडिया पर सभी न्यायाधीशों के इस्तीफे की मांग किए जाने का मुद्दा उठाया। वकील राजा चौधरी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने कहा कि सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
वकील की इस टिप्पणी पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका इस समय “नाजुक स्थिति” में है। उनकी टिप्पणी को मौजूदा परिस्थितियों में न्यायपालिका के प्रति बढ़ते सार्वजनिक दबाव और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अदालत में हुई इस टिप्पणी ने न्यायपालिका और सामाजिक माध्यमों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है। न्यायाधीशों के फैसलों पर सार्वजनिक बहस लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी संस्थागत गरिमा को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अदालतों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों पर सामाजिक माध्यमों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के इस्तीफे की मांग का मुद्दा अदालत के भीतर उठना इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका के सामने केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास बनाए रखने की चुनौती भी मौजूद है।
अदालत की टिप्पणी ने इस बहस को फिर सामने ला दिया है कि न्यायपालिका के फैसलों की आलोचना और न्यायिक संस्थाओं पर व्यक्तिगत दबाव बनाने के बीच सीमा कहां तय की जानी चाहिए।

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