*
भाजपा के अभेद्य गढ़ में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका
पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा की हार केवल एक चुनावी पराजय नहीं, बल्कि पार्टी के संगठन, नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों पर भी बड़ा सवाल बन गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपने उत्तराधिकारी को जीत नहीं दिला सके और इसके साथ ही राजधानी पटना की राजनीति में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व लगभग समाप्त हो गया।
करीब तीन दशक तक भाजपा का मजबूत गढ़ रही इस सीट पर पहले नवीन किशोर सिन्हा और फिर नितिन नवीन लगातार जीत दर्ज करते रहे। लेकिन इस बार जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा का किला ध्वस्त कर दिया। यह उपचुनाव नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट पर हुआ था।
कायस्थ राजनीति को बड़ा झटका
बांकीपुर लंबे समय से कायस्थ बहुल और भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। चुनाव से पहले भाजपा के सामने कई चर्चित कायस्थ नेताओं के नाम थे, लेकिन अंततः अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरे पर दांव लगाया गया। चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पटना की शहरी राजनीति में कायस्थ प्रतिनिधित्व कमजोर हुआ है और भाजपा की सामाजिक रणनीति पर भी सवाल उठे हैं।
भाजपा के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां
परंपरागत शहरी वोट बैंक को दोबारा मजबूत करना।
कायस्थ सहित सवर्ण मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना।
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और प्रत्याशी चयन की रणनीति पर पुनर्विचार करना।

Post a Comment