भारत में जेन-अल्फा अब सिर्फ डिजिटल दुनिया की पीढ़ी नहीं रह गई है। स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई राज्यों में बच्चों का सड़क पर उतरना इस बदलाव का संकेत है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में छात्रों ने शिक्षकों की कमी, खराब शौचालय, पीने के पानी, पंखे और स्कूल की दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर आवाज उठाई है।
उत्तर प्रदेश में सड़क तक पहुंचा गुस्सा
लखनऊ में करीब 250 छात्राओं ने स्कूल से लगभग ढाई किलोमीटर मार्च कर शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की समस्या उठाई। वहीं आजमगढ़ में छात्रों ने शिक्षकों की कमी और फीस से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। फतेहपुर में भी छात्रों के आंदोलन के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
मध्य प्रदेश में भी दिखा असर
भोपाल में छात्रों और अभिभावकों ने डीएमएस स्कूल के संभावित केंद्रीय विद्यालय में विलय के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की मांग उठाई।
आखिर इतनी ताकत कहां से आ रही है?
इस पीढ़ी की सबसे बड़ी ताकत सूचना तक तुरंत पहुंच है। बच्चे सोशल मीडिया पर अपनी समस्याओं के वीडियो और तस्वीरें साझा कर रहे हैं। इससे स्थानीय मुद्दे तेजी से सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या हर प्रदर्शन के बाद स्थायी सुधार होगा?
जेन-अल्फा के ये आंदोलन सरकार और शिक्षा विभाग के लिए चेतावनी भी हैं। बच्चे महंगे संसाधन नहीं, बल्कि पढ़ने लायक स्कूल, शिक्षक, पानी, पंखा और सुरक्षित वातावरण मांग रहे हैं। अगर इन बुनियादी मांगों के लिए भी बच्चों को सड़क पर उतरना पड़े, तो सवाल केवल बच्चों की आवाज का नहीं, बल्कि स्कूल व्यवस्था की जवाबदेही का है।

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