पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में करीब 30 वर्षों से सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ के हाथ से निकल जाने के बाद भाजपा ने अपनी हार की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी की समीक्षा बैठक में कई नेताओं ने माना कि चुनाव के दौरान जन सुराज के संस्थापक द्वारा खड़े किए गए नैरेटिव का प्रभावी जवाब देने में पार्टी सफल नहीं रही।
समीक्षा बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि स्थानीय मुद्दों, महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्रीय असंतोष जैसे विषयों पर विपक्ष की ओर से लगातार बनाए गए माहौल का समय रहते प्रभावी प्रतिवाद नहीं किया गया। कई नेताओं ने संगठन और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता में कमी को भी हार का एक बड़ा कारण बताया।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी का संदेश मतदाताओं तक अपेक्षित प्रभाव के साथ नहीं पहुंच पाया, जबकि जन सुराज ने स्थानीय मुद्दों और बदलाव की राजनीति को केंद्र में रखकर अभियान चलाया। नेताओं ने भविष्य में संगठन को और मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से बेहतर संवाद स्थापित करने तथा स्थानीय जनभावनाओं के अनुरूप रणनीति बनाने पर जोर दिया।
भाजपा नेतृत्व अब उपचुनाव के अनुभवों के आधार पर आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करने में जुट गया है, ताकि संगठनात्मक कमजोरियों को दूर कर दोबारा जनाधार मजबूत किया जा सके।

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