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क्रेडिट कार्ड: सुविधा या कर्ज का जाल?




क्रेडिट कार्ड जेब में मौजूद अतिरिक्त पैसा नहीं, बल्कि बैंक से मिली उधार की सुविधा है। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो इससे भुगतान में आसानी, रिवॉर्ड और कैशबैक जैसे फायदे मिल सकते हैं, लेकिन लापरवाही बढ़ते कर्ज में बदल सकती है।


सबसे जरूरी नियम है—हर महीने पूरा क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं। केवल न्यूनतम देय राशि भरकर बाकी रकम अगले महीने ले जाने पर ब्याज और दूसरे शुल्क तेजी से बढ़ सकते हैं। कई कार्डों पर ब्याज दर काफी ऊंची होती है और वार्षिक दर 42 प्रतिशत या उससे भी अधिक हो सकती है।


क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय अपनी आय को ध्यान में रखना जरूरी है। कार्ड की पूरी सीमा को खर्च करने की क्षमता समझना बड़ी गलती है। विशेषज्ञ आमतौर पर उपलब्ध क्रेडिट सीमा के कम हिस्से का इस्तेमाल रखने की सलाह देते हैं। 30 प्रतिशत का नियम एक उपयोगी मार्गदर्शक हो सकता है, लेकिन यह कोई अनिवार्य कानूनी सीमा नहीं है।


समय पर भुगतान करने से क्रेडिट इतिहास मजबूत हो सकता है। वहीं भुगतान में देरी, लगातार बढ़ता बकाया और सीमा का बहुत ज्यादा इस्तेमाल क्रेडिट प्रोफाइल पर असर डाल सकता है।


एक और सावधानी—क्रेडिट कार्ड से नकद निकालने से बचें। ऐसे लेनदेन में ब्याज और शुल्क की शर्तें खरीदारी से अलग हो सकती हैं।


सीधी बात यह है कि क्रेडिट कार्ड आय बढ़ाने का साधन नहीं, भुगतान का माध्यम है। जितना पैसा वास्तव में चुकाने की क्षमता हो, उतना ही खर्च करें। सुविधा को कर्ज बनने में देर नहीं लगती।

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